लेखक वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांन्त शास्त्री राजनीतिक विश्लेषक है
कश्मीर पर ढुलमुल नीति,इमरजेंसी,सिख दंगा,सोना गिरवी,मालवीय,शास्त्री,राव जैसे प्रखर राष्ट्रवादी नेताओं को दरकिनार करना, हुर्रियत फुर्रियत के हुड़क चुल्लूओं का मेहमान नवाजी कराना,देश के खजाने पर किसी एक समुदाय हक बताना, सार्वजनिक रूप से अपनी ही सरकार के कैबिनेट के फैसले को फाड़ना, राम मंदिर बनने में रोड़ा डालना, हिंदू संस्थानों को आतंकी संगठनों के बराबर तुलना करना,देशद्रोहियों पर हो रही कार्यवाही पर घड़ियाली आंसू बहाना, अभी हाल में कर्नाटक में हुए चुनाव में कांग्रेस को मिली सफलता के बाद जिस प्रकार से बहुसंख्यकों को चिड़ाने एवं अपमानित करने का जो गन्दा कार्य कांग्रेस कर रही है और बजरंग दल की तुलना दुर्दांत आतंकवादी संगठन PFI से करना जैसे अनेक विषयों की वजह से देश के आम मतदाता बना रहे हैं कांग्रेस से दूरी।
दुनिया के किसी देश में एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सत्ता के साथ एक सशक्त एवं मजबूत विपक्ष होना चाहिए, जिससे स्वतंत्र रूप से न्यायपालिका, मीडिया, विभाग एवं एजेंसियां ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करती है। अब जहां तक विपक्ष के भूमिका का सवाल है तो कांग्रेस पार्टी 2014 से उस भूमिका तक पहुंच ही नहीं पा रही है। जिससे लोकतंत्र कमजोर हो रहा है और सरकार मनमानी भी कर रही है जिसके जिम्मेदार कांग्रेश सहित समूचा विपक्ष उपरोक्त कारणों से है।
देश स्तर पर कांग्रेस इसलिए विफल रही की उसके द्वारा 2014 से लेकर अभी तक एक भी मुद्दे जनहित मे नहीं उठाया गया इसीलिए वर्षों तक चला राष्ट्रव्यापी किसान आंदोलन भी भाजपा को कहीं से झुका नहीं सका।
जिस प्रकार से कांग्रेस पार्टी सरकार से लड़ रही है उस प्रकार से न तो कांग्रेस का भला हो पायेगा और न ही सरकार का कुछ बिगड़ पाएगा।
जहां तक जनता के मुद्दों की बात और उसका हल करने की बात हो और साथ में व्यवस्था परिवर्तन करने की बात हो उसके लिए हर राजनीतिक पार्टियों को अपना कार्य शिद्दत से करना होगा और उस कार्य को जनता से मान्यता लेना होगा तभी कुछ हो सकता है अन्यथा सारी बातें उल जलूल की साबित होगी।
यदि कांग्रेस सहित देश की सभी क्षेत्रीय पार्टियों में वास्तव में मजबूती होती तो किसानों का इतना बड़ा आंदोलन न खड़ा हो पाता इससे स्पष्ट हो जाता है कि विपक्ष के पास समर्थन की कमी है कांग्रेस की यही स्थिति बनी रही तो 2024 में भी सत्ता क्या विपक्ष से भी काफी दूर हो जाएगी जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा।
तत्कालीन समय में यदि कांग्रेस चाहती तो देश के सभी विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर सरकार पर इस बात के लिए दबाव बनाती कि किसानों के सभी मांगे जायज है और इनकी मांगे मानी जाय इसमें भी कांग्रेस पूरी तरह से विफल रही जनता में विश्वास जमाना दूर रहा क्षेत्रीय पार्टियों एवं किसान नेताओ से श्रेय भी नहीं ले पाए इससे स्पष्ट हो गया की इनके इच्छाशक्ति में भी कमी है।
जिस प्रकार से पिछले दिनों कांग्रेसी नेता राहुल गांधी ने लंदन में बोला कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है और प्रियंका गांधी दिल्ली के राजघाट पर अपने धरने के दौरान उसी बात को दोहराते हुए कहा इससे वो और उनकी कांग्रेस पार्टी न तो राम में रहीं और न ही रहिम में रही।
जहां सरकार परिवारवाद पर एवं भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार कर रही है वहीं कांग्रेस न तो परिवारवाद से और न ही भ्रष्टाचार से दूर हो पा रही है बल्कि कांग्रेस गांधी परिवार को ही महिमामंडित एवं स्थापित कर सबसे काबिल बताने की कोशिश कर रही है।
जहां एक ओर पिछले दिनों राहुल को सीरियस दिखाने के लिए और साथ ही स्थापित करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने भारत जोड़ो यात्रा चलाया राहुल गांधी लंदन में जाकर सब गुड गोबर कर दिए और कांग्रेस पार्टी की नीत और योजना धरी की धरी रह गई इसी प्रकार से कॉन्ग्रेस ने जो परिश्रम करके कर्नाटक में जमीन तैयार कर ली थी उसको उनके अध्यक्ष खड़के और उनके घोषणा पत्र और राहुल की परिपक्वता ने विपक्षियों को मजबूत कर दिया इसी समय उत्तर प्रदेश में हो रहे निकाय चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने जिस प्रकार से अपनी भूमिका निभा रही है उससे यही लगता है कि कांग्रेश के भजन मंडली और चांडाल चौकड़ी ने कांग्रेसका पेड़ा कर गर्ग करने का पूरा का पूरा जिम्मा ले लिया है विपक्ष को कुछ करने की जरूरत ही नहीं रह गई इसीलिए कांग्रेश के कुछ जिम्मेदार जब अच्छी योजना बनाते हैं तो कुछ चंद्र तथाकथित उस योजना को धौलपुर शरीफ स्वयं करवा देते हैं जिससे कांग्रेश स्वयं से पीछे जा रहे हैं किसी दूसरे ने उसको पीछे करने मैं कोई दिलचस्पी नहीं दिखाते इसका जीता जागता उदाहरण दिल्ली के विधानसभा में गुजरात के विधानसभा में जिस तरह से नई पार्टी आम आदमी पार्टी ने इनका सूपड़ा साफ कर दिया तो इससे यही लगता है की कांग्रे स्कोर कांग्रेश के ही लोग आगे बढ़ना नहीं दे रहे हैं।
जहां एक और देश की सभी विपक्षी क्षेत्रीय पार्टियां 2024 का चुनाव टीना कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में लड़ने के मूड में नहीं है वही कांग्रेश कि इस तरह बुलबुल भूल भूल लुंज पुंज अस्त व्यस्त देश की सभी क्षेत्रीय पार्टियों को हैरानी में डाल दिया है इसीलिए वर्तमान सरकार से लड़ने में कोई भी पार्टी या खुलकर सामने खड़ी नहीं हो पा रही इसके बावजूद चंद्र चार्ट पैरों में राहुल के प्रधानमंत्री बनने के सपने दिखाई दे रहे जब तक कांग्रेस पार्टी राहुल राहुल के मुंह में पड़ी रहेगी तब तक कांग्रेसमें इसी तरह उल्लू जरूर की हरकतें होती रहेगी और कांग्रेसी 9 दिन पीछे जाती रहेगी जिसके कारण देश के आम मतदाता कांग्रेश से बना रहे हैं दूरी।